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इण्डियन चेस्ट सोसाइटी की भूमिका

डा. जे.के. सामरिया
राष्ट्रीय सचिव
इण्डियन चेस्ट सोसाइटी

इण्डियन चेस्ट सोसाइटी देष के ष्वास रोग विषेषज्ञों की एक अग्रणी संस्था है। इस संस्था का गठन 1980 में चुनिंदा दूरदर्षी चिकित्सा विषेषज्ञों द्वारा किया गया था। इस संस्था के गठन का विचार सर्वप्रथम डा0 एस.आर. कामथ ने रखा जो कि उस समय के.ई.एम. हास्पिटल, मुम्बई के चेस्ट मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष थे। संस्था के निर्माण एवं प्रोत्साहन के लिए डा0 ए.सी. साह, मुम्बई, डा0 सी.भी. रामाकृष्णन, चेन्नई, डा0 सी.एन. देवनायगन, चेन्नई, डा0 के.जे.आर. मूर्ति, हैदराबाद तथा डा0 समीर के. गुप्ता, कोलकत्ता का एक अंतः समूह बना। संस्था के मुख्यालय ने के.ई.एम. हास्पिटल, मुम्बई से अपने कार्य का षुभारम्भ किया। इण्डियन चेस्ट सोसाइटी का मुख्य उद्देष्य ष्वास रोग के इलाज से सम्बन्धित जानकारियों का सृजन एवं विपणन तथा इस विषेषता में इच्छुक चिकित्सकों तथा विषेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था, जहाँ से उनके कार्यो एवं षब्दों को बेहतर तरीके से सुना और समझा जा सके। ष्वास रोगों की पहली महासभा (एन.सी.आर.डी.) का आयोजन सितम्बर, 1981 में होटल प्रेसीडेंट, मुम्बई में किया गया। 1999 में सालाना (एन.सी.आर.डी.) सम्मेलन का विलय एन.सी.सी.पी.(आई) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित की जाने वाली महासभा के साथ कर दिया गया और इस प्रकार से नैपकान का सृजन हुआ। पहली नैपकान 1999 में दिल्ली में आयोजित की गई। इण्डियन चेस्ट सोसाइटी द्वारा आयोजित इस महासभा के आयोजन सचिव डा0 जे.सी. सूरी थे।

मुझे यह सूचित करने में अत्यंत प्रसन्नता है कि इण्डियन चेस्ट सोसाइटी नियमित रूप से पल्मोनरी तकनीषियन के लिए एक प्रषिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विगत 5 वर्षों से 8 केन्द्रों पर मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ, नागपुर तथा इन्दौर में करता रहा है। अब तक इण्डियन चेस्ट सोसाइटी ने 1300 से अधिक प्रषिक्षुओं को सफलता पूर्वक प्रषिक्षण एवं पूर्णता का प्रमाण पत्र दिया है। संस्था की योजना इस प्रषिक्षण कार्यक्रम को और षीघ्रता से विस्तारित करने की है। इस क्रम में और केन्द्रों को सम्मिलित करने की योजना है। इण्डियन चेस्ट सोसाइटी द्वारा ष्वास रोग की विषेषज्ञता से संबधित ज्ञान को ब़ाने की यह एक अनूठी पहल है।

इण्डियन चेस्ट सोसाइटी ष्वास रोगों से जुड़े अध्यात्मिक एवं प्रषिक्षण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में विगत 4 वर्षों से संस्था गहन चिकित्सा में प्रषिक्षण कार्यक्रम चेन्नई एवं मुम्बई केन्द्रों पर आयोजित करती रही है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ष्वास रोग विषेषज्ञों तथा परास्नातकों ने भाग लिया है। भविष्य में चिकित्सकों के लाभ के लिए इस कार्यक्रम को देष के अन्य हिस्सों में भी आरम्भ करने की योजना है।मुझे यह सूचित करते हुए हर्ष है कि इण्डियन चेस्ट सोसाइटी ने युवा ष्वास रोग विषेषज्ञों का एक अनूठा अल्पकालिक प्रषिक्षण कार्यक्रम लिए आरम्भ किया है। यह कार्यक्रम 6 सप्ताह का होगा तथा एक अत्याधुनिक केन्द्र पर आयोजित किया जाएगा। प्रषिक्षण के अलावा संस्था चुने गए अभ्यर्थी को रू0 20,000/- का संकेतिक अनुदान भी देगा। इस कार्यक्रम का षुभारंभ फरवरी 2014 में होगा।

प्रथम वर्ष में कोयम्बटूर एवं नई दिल्ली को प्रषिक्षण केन्द्र के रूप में चुना गया है। षुरू में दोनों केन्द्रों पर 2-2 युवा चिकित्सकों को प्रषिक्षित करने की योजना है। आपकों जानकर खुषी होगी कि इण्डियन चेस्ट सोसाइटी की अधिकारिक पत्रिका लंग इण्डिया नियमित रूप से डा0 वीरेन्द्र सिंह के गतिषील नेतृत्व में नए स्वाद एवं समृद्ध वैज्ञानिक सामग्री के साथ प्रकाषित की जा रही है। मुझे हर्ष है कि लंग इण्डिया पहले से ही इण्डियन मेडलार एवं पबमेड में अनुक्रमित है। इसके पिछले सभी अंक भी पबमेड पर उपलब्ध है। आपको यह जान कर प्रसन्नता होगी कि लंग इण्डिया का प्रषस्ति पत्र सूचकांक 0.81 है जो कि कई प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिकाओं से बेहतर है। लंग इण्डिया का वर्तमान क्रमांक 119 है एवं इसका विषाल राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पाठक समूह है।

मुझे पुनः अपार हर्ष है कि इस वर्ष से इण्डियन चेस्ट सोसाइटी ने युवा ष्वास रोग चिकित्सकों को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों ए.टी.एस., ए.सी.सी.पी. एवं ई.आर.एस. हेतु वित्तीय सहायता देने का अनूठा कार्यक्रम आरम्भ किया है। यह अनुदान युवा वैज्ञानिकों को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने षोध कार्य को प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस अनुदान में रू0 50,000/- नगद (ए.टी.एस. एवं ए.सी.सी.पी. के लिए) रू0 35,000/- (ई.आर.एस. के लिए) तथा मुफ्त पंजीकरण जो कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा दिया जायगा, सम्मिलित है। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने षोध कार्य को प्रस्तुत करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है।

इण्डियन चेस्ट सोसाइटी देष में ष्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान गतिविधियों के लिए एक प्रर्वतक और उत्तेजक के रूप में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में डा0 वीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में 36 केन्द्रों पर पैरन्काइमल लंग डिज़ीज़ पर एक बहु-केन्द्रित अनुसंधान परियोजना का आरम्भ किया गया है। यह परियोजना बेहतरीन ंग से क्रियान्वित हो रही है। ष्वसन चिकित्सा की विषेषता को नए आयाम देने के लिए अपनी निरन्तर चेष्टा में एन.सी.सी.पी.(आई.) के साथ इण्डियन चेस्ट सोसाइटी ने फरवरी 2013 में सी.ओ.पी.डी. के भारतीय दिषा निर्देष के विकास की परियोजना को सफलता पूर्वक पूरा किया। इन दिषा निर्देषों का प्रकाषन हो चुका है एवं यह चिकित्सकों के लाभ के लिए उपलब्ध है। मुझे यह सूचित करने में और भी प्रसन्नता है कि एन.सी.सी.पी.(आई.) के साथ इण्डियन चेस्ट सोसाइटी एक और परियोजना आरम्भ करने जा रही है जो भारत में वयस्कों में अस्थमा के निदान एवं प्रबंधन के दिषा निर्देष तैयार करेगी।

यह परियोजना मार्च, 2014 में षुरू होगी।मुझे यह सूचित करते हुए पुनः अपार हर्ष है कि इण्डियन चेस्ट सोसाइटी लगातार अपनी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति में इजाफा कर रही है एवं सभी महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में इसकी उपस्थिति महत्वूपर्ण रही है। मई 2013 में फिलाडेल्फिया में ए.टी.एस. तथा सितम्बर 2013 में वार्सिलोना में ई.आर.एस. के सम्मेलनों में इण्डियन चेस्ट सोसाइटी ने अपना बूथ स्थापित किया। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में संस्था के बूथ अनिवासी भारतीयों सहित सभी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए एक मिलन केन्द्र का काम करता है। इण्डियन चेस्ट सोसाइटी के बूथ पर लहराता तिरंगा सभी भारतीय प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय गौरव का एहसास कराता है। आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि इन बूथों के माध्यम से कई अंतराष्ट्रीय सदस्य इण्डियन चेस्ट सोसाइटी में षामिल हो चुके है।
डा0 जेण्केण् सामरिया
राष्ट्रीय सचिवए इण्डियन चेस्ट सोसाइटी
प्लाट नं0 36.एए कबीर नगर कालोनी
दुर्गाकुण्डए वाराणसी.221005
टेलीण्रू 91ण्542ण्2310333ए मोण्रू 9919600333

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