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खांसी  

डॉ. बी.बी. माथुर, 
एम.डी. (क्षय रोग और श्वसन रोगों)
प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष,
विभाग. पल्मोनरी मेडिसिन.
की एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर
पता, 3/7, मेडिकल कॉलेज कैम्पस,
बीकानेर 334,003
टेलीफोन: 0151-2528789,0151-2226333, मो 9414138689
ईमेल आईडी: drmathurbb@yahoo.co.in

(खांसी स्वयं में बीमारी नहीं है परन्तु अनेकानेक श्वांस, फेफड़ों व शरीर के अन्य अंगो से संबंन्धित बीमारियों का एक लक्षण है। सामान्यतः अधिकांश श्वास व फेफड़ों के रोगों में खांसी एक लक्षण हो सकता है। सामान्य जुकाम से लेकर फेफड़ों के कैंसर खांसी पैदा कर सकते हैं। इसलिए खांसी को हमेशा गंभीर लक्षण मानकर उचित इलाज लेना समझदारी है। लेखक ने सरल भाषा का प्रयोग कर खांसी की उत्पत्ति, कारण, निदान एवं इलाज आदि को समझाने का सराहनीय प्रयत्न किया है।

संपादक)

प्यारे दोस्तों,
खांसी श्वसन रोग का एक आम लक्षण है। सभी उम्र के मरीजो में डाॅक्टर से परामर्ष लेने के लिए खांसी सबसे आम कारण है। खांसी श्वसन नलियो की परत में उपस्थित संवेदी तंत्रिकाओं की उतेजना से उत्पन्न होती है और परिणाम के रूप में हवा उच्च दबाव से श्वसन नली से बाहर निकलती है। खांसी श्वसन तंत्र को धूल, गंदगी व कीटाणु से बचाने के लिए शरीर की रक्षात्मक क्रिया है। यह धूल व गंदगी श्वसन तंत्र में संक्रमण पैदा कर सकती है। खांसी आने का मतलब है कि श्वाॅंस नलियो में कुछ अवांछित कण है जो वहांॅ नही होने चाहिए, जैसे धूल के कण या भोजन के कण इत्यादि। खांसी एक व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से की जा सकती है लेकिन सामान्यतया यह एक अनैच्छिक प्रक्रिया है।खांसी के कारणखांसी को अवधि के अनुसार दो प्रकार में वर्गीकृत किया जा सकता है। कम अवधि की खांसी: इस प्रकार की खांसी अचानक शुरू होती है पर दो तीन सप्ताह में ठीक हो जाती है। इस प्रकार की खांसी के मुख्य कारण है, –
आम सर्दी : अप्पर रेस्पिरेटरी इन्फेक्षनद्ध एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, न्यूमोनिया, श्वास नली में किसी वस्तु के फंस जाने से, दिल का दौरा इत्यादि।
पुरानी खांसी : इस प्रकार की खांसी तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहती है। पुरानी खांसी के मुख्य कारणो में धूम्रपान, सीओपीडी, दमा ,अस्थमाद्ध क्षय ,टीबीद्ध प्रदूषण, एलर्जी, दवाईयाॅ, इत्यादि है।
खांसी से जुडे लक्षणकभी कभी खांसी के साथ बलगम या कफ भी निकलता है तो इसे गीली खांसी कहते है और अगर खांसी के साथ बलगम नही निकलता है तो उसे सूखी खांसी कहते है।
बलगम युक्त खांसी आम तौर पर संक्रमण, न्यूमोनिया या फेफडो के क्षय रोग आदि के कारण होती है। सूखी खांसी आम तौर पर धूम्रपान, अस्थमा ; दमा द्ध या फेफडो के कैंसर आदि के कारण होती है।
अगर खांसी के साथ बुखार, गले में दर्द या नाक से पानी आ रहा हो तो जुकाम या आम सर्दी की वजह से हो सकता है। नाक का बहना व बार-बार गला साफ करना पोस्ट नेजल ड्रिप की और संकेत करता है।
मौसम में बदलाव से होने वाली खांसी व साॅस के साथ सीटी बजना अस्थमा को इंगित करता है। सामान्यतया अस्थमा के रागियों में रात के समय खांसी ज्यादा आती है।
छाती में जलन व एसिडीटी, खट्टी डकार आना गेस्ट्रो इसोफेजियाम रिफ्लेक्ट्स डिजीज का संकेत है।
कुछ रोगियों में खांसी धूम्रपान की वजह से होती है।
कुछ ब्लडप्रेषर कम करने वाली दवाईयाॅं भी खांसी का कारण हो सकती है। बलगम के साथ खून फेफडो के क्षय रोग, फेफडो के केन्सर, न्यूमोनिया, ब्रोन्कियेक्टेसिस व फेफडो में मवाद पड जाने से आ सकता है।
खांसी का निदानबलगम जाॅच:- यदि किसी भी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा खांसी आ रही है तो उसे तुरन्त बलगम में टीबी के किटाणुओं की जाॅच करवानी चाहिए। यह जाॅच हर सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र पर मुफ्त उपलब्ध है।
रक्त जाॅच:- खून जाॅच द्वारा खांसी के रोगी में संक्रमण व एलर्जी का पता लगाया जा सकता है।
एक्स-रे:- छाती के एक्स-रे से खांसी के रोगियों में क्षय रोग, दमा, न्यूमोनिया, फेफडो के केन्सर व ब्रोन्कियेक्टेसिस इत्यादि का पता लगाया जा सकता है।
अन्य विषेष जाॅच:- फाइबर आॅप्टिक ब्रोंकोस्कोपी ;दूरबीन द्वारा जाॅचद्धः- यह जाॅच फेफडो के कैंसर के निदान व श्वास नली में फंसी हुई वस्तु का पता लगाने में अत्यन्त सहायक है।
पी.एफ.टी. ;पल्मोनेरी फन्कषन टेस्टद्ध:- इस जाॅच द्वारा फेफडो की कार्य क्षमता का पता लगाया जाता है यह अस्थमा एवं सीओपीडी के रोगियों में अत्यन्त उपयोगी है
सीटी स्केन:- फेफडो के कैंसर, ब्रोन्कियेक्टेसिस व आई.एल.डी ;इन्टरस्टीषियल लंग डिजीजद्ध का पता लगाने में उपयोगी है।
खांसी के उपचारखांसी कोई बीमारी नही लक्षण है। खांसी का निष्चित इलाज उसके मूल कारण के निर्धारण एवं उसकी चिकित्सा पर निर्भर करता है।
श्वाॅंस नलियों में संक्रमण और न्यूमोनिया का इलाज एंटीवायोटिक दवाओं के द्वारा सम्भव है।
फेफडो के क्षय रोग का इलाज विेषेष टीबी की दवाओं द्वारा किया जा सकता है।
खांसी अगर अस्थमा या दमा के कारण है तो श्वसन नलियों में सूजन कम करने वाली दवाओं व श्वास की दवाओं द्वारा खांसी पर नियन्त्रण किया जा सकता है। ये दवाऐ सीओपीडी के रोगियों में भी प्रभावी है। इन दवाओं को इन्हेलर ;मीटर्ड डोज़ इनहेलर एवं ड्रªाई पाऊडर इनहेलरद्ध या भाप ;नेबूलाईजरद्ध द्वारा दिया जा सकता है।
अगर किसी रोगी में खांसी बल्डप्रेषर ; रक्तचाप द्ध कम करने वाली कुछ विषेष दवाओं की वजह से है तो इन दवाओं की जगह दूसरी दवाओं का उपयोग करने से खांसी पर नियन्त्रण किया जा सकता है।
गेस्ट्रो इसोफेजियाम रिफ्लेक्ट्स डिजीज के रोगियों में एंटी एसिडिटी दवाओं एवं सोते समय पलंग का सिर की तरफ वाला हिस्सा ऊॅचा रखने से खांसी को कम किया जा सकता है।
पोस्ट नेजल ड्रिप ;नाक के पीछे गले में बलगम आनाद्ध के कारण हाने वाली खांसी पर नाक के स्प्रे एवं डीकन्जेस्टेन्ट दवाओं द्वारा नियन्त्रण किया जा सकता है।
काली खांॅसी के लिए एंटी-बायोटिक ;इरीथ्रोमाइसिनद्ध दवाओं द्वारा उपचार आवष्यक है। काली खांसी से बचाव के लिए बच्चों को डी.पी.टी. का टीका लगवाया जा सकता है।
यदि खांसी धूल के कण, पालतू पशुओं के बालों, प्रदूषण, धुॅए अथवा औधोगिक रसायनो के कारण है तो इन सब से बचाव रख कर एवं कुछ एलर्जी की दवाओं द्वारा खांसी का उपचार किया जा सकता है।
खांसी के लक्षण आधारित उपचारयदि खांसी का कारण पता न चले या खांसी से रोगी को काफी असुविधा हो रही हो तो खांसी के लक्षण आधारित उपचार दिया जाता है। खांसी को दबाने के लिए कोडीन, डेक्सोमेथोरफान या बेन्जोनेटेट नामक दवाओं का उपयोग किया जाता है। यह दवाईयाॅ खांसी को दबाकर रोगी को आराम देती है। कुछ खांसी की दवाईयाॅ नषीली होती है अतः इनको लेते समय व्यक्ति को गाडी चलाने में, कोई मषीन चलाने में सावधानी बरतनी चाहिए तथा शराब का सेवन नही करना चाहिए।
खांसी की उपेक्षा न करें यदिखांसी के साथ सांॅस लेने में तकलीफ हो।
खांसी के साथ बुखार या बलगम आ रहा हो।
खांसी के साथ खून आ रहा हो।
खांसी को दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हो।
खांसी की वजह से व्यक्ति को अपने नित्य के काम करने या नींद लेने में दिक्कत आ रही हो।
खांसी के साथ सीने में दर्द हो।
कुछ समय पहले अस्पताल में भर्ती रहे हो।

याद रखे बिना डाॅक्टर की सलाह के खांसी की दवाओं का उपयोग न करे। खांसी की दवाऐ विभिन्न प्रकार की होती है तथा इनके उपयोग भी भिन्न होते है। इनमें से कुछ बलगम युक्त खांसी में उपयोगी होती है तथा कुछ सूखी खांसी में उपयोगी होती है।

खांसी होने पर क्या करना चाहिएखांसी करते वक्त हमेषा मॅुह व नाक को रूमाल से ढकना चाहिए।
बलगम को यहाॅ वहाॅ नही थूकना चाहिए, बलगम थूकने के लिए एक बन्द डिब्बा इस्तेमाल करना चाहिए तथा इसे उपयुक्त तरीके से फेंकना चाहिए। क्योंकि यह आपके परिवार के सदस्यों तथा दूसरे व्यक्तियों में संक्रमण फेला सकता है।
अपने डाॅक्टर को हमेंषा बताए किआपको कितने समय से खांसी है।
क्या आपने कुछ दवाईयाॅ ली है तो उसके बारे में बताएॅं।
क्या आपकी खांसी में खून आ रहा है।
क्या आपके बुखार, गले में दर्द, नाक से पानी आ रहा है।
क्या आप धूम्रपान करते है।
क्या आपको साॅंस लेने में तकलीफ होती है।
क्या आप वर्तमान में अथवा पूर्व में किसी बीमारी से पीडित रहे है।
क्या आपकी खांसी उठने बैठने, व्यायाम करने से, धूल मिट्टी से, या रात के समय अथवा अन्य किसी कारण से घटती या बढती है।

डॉ. बी.बी. माथुर
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